Tuesday, July 25, 2017

एक शाश्वत सत्य ...निधि सक्सेना


घुंधला धुंधला सा स्वप्न था वो
तुम थमी थमी मुस्कुराहटों में गुम
हाथ में कलम लिए
मुझे सोचते
मुझे गुनगुनाते
मुझ पर नज़्म लिखते..
वहीं थिर गईं आँखे
वहीं स्थिर हो गया समय
सतत अविनाशी..
मैं उसी स्वप्न में कैद हो गई हूँ..
कि तुम चाहो
इससे अधिक कुछ चाह नही..
यही निर्वाण है मेरा
यही नितांत सुख..
आँखो में ठहरा ये स्वप्न
बस यही है एक शाश्वत सत्य ...
~निधि सक्सेना

Monday, July 24, 2017

आग, पानी और प्यास....प्रेम नंदन









जब भी लगती है उन्हें प्यास
वे लिखते हैं
खुरदुरे कागज के चिकने चेहरे पर
कुछ बूँद पानी
और धधकने लगती है आग !
इसी आग की आँच से
बुझा लेते हैं वे
अपनी हर तरह की प्यास !
मदारियों के
आधुनिक संस्करण हैं वे
आग और पानी को
कागज में बाँधकर
जेब में रखना
जानते हैं वे!
- प्रेम नंदन
संपर्क – 
उत्तरी शकुन नगर, 
सिविल लाइन्स, 
फतेहपुर, (उ०प्र०)|
मोबाइल – 09336453835
ईमेल - premnandan10@gmail.com

Sunday, July 23, 2017

आंखो से गिरे है मोती हजारो.....प्रीती श्रीवास्तव

तेरी बेवफाई का शिकवा सनम ! 
मै किसी से कर नही सकती !!

है गुनाहगार तू मेरा कहकर !
साहिब आहें भर नही सकती!!

इल्जाम क्या दूं मै तुझको !
बिन आइना संवर नही सकती !!

की हिमाकत मैने जहां मे सनम !
संगदिलो से जंग लड़ नही सकती !!

अब तो खुदाया का आसरा है !
दर्दे-दिल से अब गुजर नही सकती !!

लिख दूं नाम तेरा हर हरफ पर!
शरारत मै ऐसी कर नही सकती !!

तारीफ क्या करूं उस नाचीज की !
आबरू जिसकी बिगड़ नही सकती !!

आंखो से गिरे है मोती हजारो !
दामन खाली ये भर नही सकती !!

तराना क्या छेड़ू ग़ज़ल मे !
प्रीत बिन मुकम्मल कर नही सकती !!

कुछ नया कर जाऊं तो अच्छा! 
आखिरी दम मगर पढ़ नही सकती !!

सात फेरे सात जन्मों का बंधन!
सात आरजुये मगर निखर नही सकती!!

कर जाये वो वफा तेरे साथ भी! 
उम्मीद न कर ठहर नही सकती !!

तेरी पालकी में चार फूल अच्छे !
तेरे नाम से बगिया बिखर नही सकती !!

-प्रीती श्रीवास्तव..

Saturday, July 22, 2017

एक और क्षितिज .......चंचलिका शर्मा


क्षितिज के 
उस पार भी है 
एक और क्षितिज 
चल मन चलें उस पार ..........

जहाँ तितलियाँ
इठलातीं , इतराती 
लहराती लहरों सी है 
जैसे दूर सागर के उस पार .......

भटक नहीं 
किसी बंधन में 
छोड़ उस पार की चिंता 
रम जा अब सिर्फ़ ही इस पार ......... 
- चंचलिका शर्मा

Friday, July 21, 2017

माँ की सीख..... निधि सक्सेना



सुनो बेटा
वहाँ परदेस में
अपनी दोनों कलाईयों पर घड़ी बाँधे रखना..
हाँ ये कुछ अजीब जरूर है
पर इसमें हर्ज कुछ नही..
तुम्हारी बायीं कलाई पर बंधी घड़ी स्थानिक समय दिखाए
वहां की धारा के संग बहने के लिए..
और दायीं कलाई पर बंधी घड़ी पर
भारत का समय बाँधना 
कि अपने दायीं ओर से तुम हमेशा आश्वस्त रहो
कि हम हैं यहाँ हर वक्त हर घड़ी..
कि तुम्हें यहाँ के समय का संज्ञान रहे
कि तुम हमेशा बंधे रहो 
अपने भूमि से
अपने रिश्तों से..
कि घड़ी की टिक टिक
तुम्हें यहाँ की मधुरता की याद दिलाती रहे
पल पल आशा और सुख की स्मृतियाँ रहें
और वही टिक टिक
हर निराशा और कुंठा मिटाती रहे
लाचारी और बेबसी विस्मृत कराती रहे....
- निधि सक्सेना

Thursday, July 20, 2017

क्या आपने कभी इन पश्चिमी दार्शनिकों को पढ़ा है


*लियो टॉल्स्टॉय (1828 -1910)*
"हिन्दू और हिन्दुत्व ही एक दिन दुनिया पर राज करेगी, क्योंकि इसी में ज्ञान और बुद्धि का संयोजन है"।

*हर्बर्ट वेल्स (1846 - 1946)*
" हिन्दुत्व का प्रभावीकरण फिर होने तक अनगिनत कितनी पीढ़ियां अत्याचार सहेंगी और जीवन कट जाएगा । तभी एक दिन पूरी दुनिया उसकी ओर आकर्षित हो जाएगी, उसी दिन ही दिलशाद होंगे और उसी दिन दुनिया आबाद होगी । सलाम हो उस दिन को "।

*अल्बर्ट आइंस्टीन (1879 - 1955)*
"मैं समझता हूँ कि हिन्दूओ ने अपनी बुद्धि और जागरूकता के माध्यम से वह किया जो यहूदी न कर सके । हिन्दुत्व मे ही वह शक्ति है जिससे शांति स्थापित हो सकती है"।

*हस्टन स्मिथ (1919)*
"जो विश्वास हम पर है और इस हम से बेहतर कुछ भी दुनिया में है तो वो हिन्दुत्व है । अगर हम अपना दिल और दिमाग इसके लिए खोलें तो उसमें हमारी ही भलाई होगी"।

*माइकल नोस्टरैडैमस (1503 - 1566)*
" हिन्दुत्व ही यूरोप में शासक धर्म बन जाएगा बल्कि यूरोप का प्रसिद्ध शहर हिन्दू राजधानी बन जाएगा"।

*बर्टरेंड रसेल (1872 - 1970)*
"मैंने हिन्दुत्व को पढ़ा और जान लिया कि यह सारी दुनिया और सारी मानवता का धर्म बनने के लिए है । हिन्दुत्व पूरे यूरोप में फैल जाएगा और यूरोप में हिन्दुत्व के बड़े विचारक सामने आएंगे । एक दिन ऐसा आएगा कि हिन्दू ही दुनिया की वास्तविक उत्तेजना होगा "।

*गोस्टा लोबोन (1841 - 1931)*
" हिन्दू ही सुलह और सुधार की बात करता है । सुधार ही के विश्वास की सराहना में ईसाइयों को आमंत्रित करता हूँ"।

*बरनार्ड शॉ (1856 - 1950)*
"सारी दुनिया एक दिन हिन्दू धर्म स्वीकार कर लेगी । अगर यह वास्तविक नाम स्वीकार नहीं भी कर सकी तो रूपक नाम से ही स्वीकार कर लेगी। पश्चिम एक दिन हिन्दुत्व स्वीकार कर लेगा और हिन्दू ही दुनिया में पढ़े लिखे लोगों का धर्म होगा "।

*जोहान गीथ (1749 - 1832)*
"हम सभी को अभी या बाद मे हिन्दू धर्म स्वीकार करना ही होगा । यही असली धर्म है ।मुझे कोई हिन्दू कहे तो मुझे बुरा नहीं लगेगा, मैं यह सही बात को स्वीकार करता हूँ ।"

Wednesday, July 19, 2017

थोड़ा रोमांच भर लायें.....निधि सक्सेना



बहुत कड़वा हो गया है जिंदगी का स्वाद
चलो किसी खूबसूरत वादी से
थोड़ा रोमांच भर लायें..
मुद्दत हुई हमें जी भर के हँसे
चलें किसी दरिया किनारे
मौजों से थोड़ी मौजें मांग लायें..
दरक गया है कहीं कुछ भीतर
मन ठंडे बस्ते में पड़ा रहता है
चलो चाँद के थोड़ा करीब चलो
रूमानी होने का खेल करो
भीगे पाँव कुछ अठखेलियाँ हों
कि जिंदगी के मिज़ाज कुछ जहीन हों...
~निधि सक्सेना