Wednesday, April 12, 2017

उसके सिवा कोई न था............श्रीमती आशा शैली


मुझको बस इक आसरा, उसके सिवा कोई न था
जिस घड़ी कश्ती का मेरी नाखुदा कोई न था।

हैं मेरी तन्हाइयाँ पुरनूर तेरी याद से
तू ही तू था पास मेरे, दूसरा कोई न था।

तुमने मेरा हाथ थामा, मेरे रहबर आनकर
सामने मेरे बचा जब रास्ता कोई न था।

मैं तेरे दर पर सदा देती रही शामो-सहर
ये भी सच है पास मेरे मसअला कोई न था।

बंद आँखों से तेरा दीदार 'शैली' ने किया
एक पल भी दिल में मेरे दूसरा कोई न था।
-श्रीमती आशा शैली 


6 comments:

  1. आशा शैली जी की सुन्दर रचना प्रस्तुति हेतु धन्यवाद

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  2. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 13-04-2017 को चर्चा मंच पर चर्चा - 2618 (http://charchamanch.blogspot.com/2017/04/2618.html) में दिया जाएगा
    धन्यवाद

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  3. प्रभावशाली प्रस्तुति...
    मेरे ब्लॉग की नई प्रस्तुति पर आपके विचारों का स्वागत।

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  4. सुन्दर प्रस्तुति

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